Our Story
क्योंकि तुम लाखों में एक हो
मेरा जीवन ऐसा क्यों? मेरे साथ ही सब कुछ ऐसा क्यों होता है? ज़िंदगी मुझे ही धोखा क्यों देती है?
मेरा जीवन ऐसा क्यों? मेरे साथ ही सब कुछ ऐसा क्यों होता है? ज़िंदगी मुझे ही धोखा क्यों देती है? दुनिया में सब खुश हैं, मेरा संघर्ष अभी तक क्यों चल रहा है? ऐसे ही न जाने कितने सवाल बहुत सारे लोगों के मन में रहते हैं।
तो आइए, इन सारे सवालों के जवाब हम ढूँढ़ते हैं तारा की कहानी में।
तारा शक्ति की उपासना करने वाली माँ तारा की सच्ची भक्त, एक सभ्य और सुंदर लड़की है, लेकिन उसका जीवन भी कुछ अनोखा है। जीवन में कदम-कदम पर उसे परीक्षाएँ देनी पड़ती हैं। बड़ी मुश्किलों से उसके स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई पूरी हुई और बहुत ही मुश्किल से उसे नौकरी भी मिली।
ऐसा नहीं है कि तारा को पैसों की कमी थी। तारा आर्थिक रूप से संपन्न थी। उसके माता-पिता सरकारी नौकरी में थे, लेकिन तारा के जीवन में ऐसी परेशानियाँ रहती थीं, जिन्हें समझ पाना ही बहुत मुश्किल होता था।
तारा की माँ का स्वास्थ्य तो तारा के स्कूल में होने के समय से ही खराब रहता था। तारा घर की जिम्मेदारियाँ भी पूरी करती और साथ में अपनी पढ़ाई भी। माता-पिता की सैलरी का बहुत बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य संबंधी खर्चों में जाने लगा। तारा को अपनी स्कूल-कॉलेज की फीस ट्यूशन पढ़ाकर ही पूरी करनी पड़ी।
ऐसा नहीं था कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ ही थीं, बल्कि छोटी-छोटी ऐसी परेशानियाँ भी मानो हमेशा तारा का रास्ता रोके खड़ी रहती थीं। लेकिन फिर भी तारा को महाशक्ति माँ तारा पर भरोसा था।
वह सबसे कहती, “एक दिन माँ तारा मेरे जीवन में सब कुछ ठीक कर देगी।”
लेकिन दूसरी तरफ वह माँ से बहुत सारी शिकायतें भी करती कि मेरा जीवन ही ऐसा क्यों है? जब भी कुछ करने जाती हूँ, एक बार में सब कुछ ठीक नहीं होता। जब भी कुछ अच्छा सोचती हूँ, जल्दी पूरा नहीं होता।
बस मन में ढेर सारे जीवन के सुनहरे सपने लिए तारा हर दिन नई चुनौती के लिए तैयार रहती।
जैसे-तैसे माता के स्वास्थ्य का खर्च चल रहा था। अब तो तारा के पिताजी भी लकवे से पीड़ित हो गए। घर का खर्च, इलाज और आजीवन संघर्ष, यह सब तारा के जीवन का हिस्सा बन चुका था।
तारा ने सोच लिया था कि वह कभी भी विवाह नहीं करेगी। सारी जिंदगी अपने माता-पिता की सेवा करेगी।
अब तो तारा को बहुत सारे पैसों की जरूरत थी, अपने माता-पिता के इलाज के लिए, क्योंकि तारा की सैलरी बहुत कम थी और उसके माता-पिता की तनख्वाह भी कम पड़ती थी।
तारा सरकारी नौकरी के लिए बहुत सारे कॉम्पिटिटिव एग्जाम देती थी, लेकिन कहीं सिलेक्शन नहीं होता था। हर बार तारा फेल हो जाती थी।
लेकिन तारा ने हिम्मत नहीं हारी। वह लगातार प्रयास करती रही। वह रोज माँ तारा के मंदिर जाती और कहती, “माँ, आपने मेरे लिए जो सोचा है, जो चाहा है, मुझे सब कुछ मंजूर है, लेकिन मेरे माता-पिता को ठीक कर दीजिए।”
माँ तारा की मूर्ति से ऐसा प्रतीत होता, मानो माँ तारा प्यार से तारा की तरफ देख रही हों और मूर्ति से निकलकर उसे आशीर्वाद दे रही हों।
कुछ दिनों के बाद अचानक तारा के पिताजी बहुत सीरियस हो गए। डॉक्टर ने जवाब दे दिया कि अब हम कुछ नहीं कर सकते।
तारा के आँसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
उसी रात तारा के सपने में माँ तारा आईं और कहा, “तारा, जो लोग विशेष होते हैं, जिन लोगों में जीवन के संघर्ष को सहने की क्षमता होती है, जो दूसरों का भला चाहते हैं, जो स्वार्थी नहीं होते, ईश्वर उन्हीं को चुनते हैं।
तुम्हारी शिकायत रहती थी न कि दुनिया में लाखों लोग हैं, फिर मेरा जीवन ऐसा क्यों?
क्योंकि तुम लाखों में एक हो।”
अचानक से तारा की नींद खुली तो उसने देखा कि उसके पिताजी भी ठीक हो गए हैं और माँ का स्वास्थ्य भी अच्छा है।
और तारा को बहुत बड़ी नौकरी का कॉल लेटर दिया गया। और साथ ही तारा के लिए बहुत अच्छा रिश्ता भी आ गया।
तारा की कहानी हमें अटूट भक्ति के साथ यह भी सिखाती है कि यदि किसी के जीवन में लंबे समय तक संघर्ष चलता रहे या उसे बहुत अजीब और अनोखी परेशानियों का सामना करना पड़े, तो समझ लेना चाहिए कि ईश्वर ने उसे किसी विशेष उद्देश्य के लिए चुना है।